'निजता' अब मूल अधिकार सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-2 : शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध। (खंड-5: संसद और राज्य विधायिका- सरंचना, कार्य, कार्य संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इससे उत्पन्न होने वाले विषय) (खंड-06: कार्यपालिका और न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्य- सरकार के मंत्रालय एवं विभाग, प्रभावक समूह और औपचारिक/अनौपचारिक संघ तथा शासन प्रणाली में उनकी भूमिका।) भूमिका इतिहास को बनते हुए देखना अपने आप में एक सौभाग्य है और फिर इतिहास रोज़ बनते भी तो नहीं, किन्तु निजता के मामले में उच्चतम न्यायालय की नौ जजों की संविधान पीठ का निर्णय आज़ाद भारत में एक ऐसी ऐतिहासिक घटना है, जो आने वाले दशकों में लोकतंत्र को मज़बूती देने का कार्य करती रहेगी। न्यायालय ने कहा है कि निजता का अधिकार एक मौलिक अधिकार है, जिसे अनुच्छेद 21 के अंतर्गत सरंक्षण प्राप्त है। दरअसल, इस मामले की सुनवाई के दौरान एटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने कहा था कि निजता एक इलीट अवधारणा है यानी प्राइवेसी खाते-पीते घरों की बात है और...